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रोगों से कैसे बचें जाने सबसे सरल तरीका

पानी शुद्ध पियो

2. रोगों से बचने का सबसे आसान नुस्खा

1. उषापान से अनेक रोगों से मुक्ति और बचाव

सांयकाल तांबे के एक बर्तन में पानी भरकर रख लें। प्रातः सूर्योदय से पूर्व उषापान के रूप में उस बासी पानी को आठ अंजलि (250 ग्राम) की मात्रा में नित्य बासी मुंह धीरे-धीरे पीएं और फिर सौ कदम टहलकर शौच जाएं। इससे कब्ज दूर होकर शौच खुलकर आने लगेगा।

पानी शुद्ध पियो

इस प्रकार उषापान करने वाला व्यक्ति मलशुद्धि के साथ बवासीर, उदर रोग, यकृत प्लीहा के रोग, मूत्र और वीर्य सम्बन्धी रोग, – कुष्ट, सिर दर्द, नेत्र विकार तथा वात पित्त और कफ से होने वाले अनेकानेक रोगों से मुक्त रहता है। बुढ़ापा उसके पास नहीं फटकता और वह शतायु होता है।

विशेष – ( 1 ) यदि वह जल मुख की बजाय नासिका से पिया जाए तो सिरदर्द, जुकाम चाहे नया हो या पुराना, नजला, नक्सीर आदि रोग जड़मूल से दूर हो जाते हैं। नेत्र ज्योति गरुड़ के समान तीव्र हो जाती है। केश असमय सफेद नहीं होते तथा – सम्पूर्ण रोगों से मुक्त रहता है।

(2) शीत ऋतु में जल अत्यन्त शीतल हो तो उसे थोड़ा गुनगुना करके पीया जा सकता है। (3) सूर्योदय से पूर्व पिया गया पानी मां के दूध के समान गुणकारी माना गया है। पानी अनेक रोगों की एक दवा जल चिकित्सा पद्धति

जापान के ‘सिकनेस एसोसिएशन’ द्वारा प्रकाशित एक लेख में इस बात की पुष्टि की गई है कि यदि सही ढंग से पानी का प्रयोग किया जाए तो कई पुरानी तथा नई बीमारियां दूर हो सकती हैं। जैसे- सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, खून की कमी, जोड़ों के दर्द (आर्थराइटिस), आमवात, (रियुमेटिज्म), लकवा, दिल की बीमारियां, खांसी, ब्रोंकाइटिस,

ब्रोकियल दमा, टी० बी० आदि फेफड़ों की बीमारियां, यकृत रोग, अति अम्लता, ग्रेस्ट्राइटिस, पेचिश, कब्ज आदि पाचन संस्थान की बीमारियां, मूत्र संबंधी बीमारियां, अनियमित मासिक, गर्भाशय • और स्तन कैंसर, नाक, गले और कान से सम्बन्धित बीमारियां, नेत्र रोग आदि । – यदि स्वस्थ व्यक्ति यह प्रयोग करें तो अपने स्वास्थ्य को कायम रख सकता है।

पानी शुद्ध पियो

पानी पीने की विधि -प्रातः उठते ही, बिना मंजन या ब्रश किए, लगभग सवा

लीटर (चार गिलास) पानी एक साथ पिएं, एक के बाद एक गिलास। इसके बाद एक

घंटे तक कुछ भी खाए-पिएं नहीं। पानी पीने के बाद मुंह धो सकते हैं व ब्रश कर

सकते हैं। रोगी और बहुत ही नाजुक प्रकृति के व्यक्ति एक साथ चार गिलास पानी नहीं पी सकें, उन्हें चाहिये कि वे पहले एक या दो गिलास से शुरू करें और बाद में हो सकता धीरे-धीरे एक-एक गिलास बढ़ाकर चार गिलास पर आ जाएं।

प्रथम एक या दो गिलास पानी से उनके स्वास्थ्य पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता। हां, प्रारंभ के तीन-चार दिन तक पानी पीने के बाद एक घंटे में तीन-चार बार मूत्र है और कुछ व्यक्तियों को पतले दस्त भी आ सकते हैं। लेकिन तीन चार दिनों बाद मूत्र नियमित होकर धीरे-धीरे सभी कुछ सामान्य हो जाएगा।

जो लोग जोड़ों के दर्द एवं वात रोग से पीड़ित हैं, उन्हें यह प्रयोग पहले सप्ताह तक दिन में तीन बार करना चाहिये और फिर एक सप्ताह के बाद दिन में एक बार करना पर्याप्त है। भोजन करने के दो घंटे बाद जल चिकित्सा पद्धति से पानी पिया जा सकता है।

 

रोगों से बचने के लिए इन चीज़ों से परहेज़ ज़रूर करें

उपरोक्त पानी का प्रयोग रोगी और स्वस्थ दोनों ही लाभ के साथ कर सकते हैं परन्तु इस प्रयोग को करने वालों के लिए कुछ हिदायतों का पालन जरूरी है- (1) ठंडे पेय, मैदे और बेसन की बनी चीजें, तले हुए खाद्य पदार्थ, तेज मिर्च-मसालों और मिठाइयों से परहेज किया जाए और यथासंभव फल और हरी सब्जियों पर जोर दिया जाए। (2) चाय, काफी, चाकलेट, आइसक्रीम आदि की मनाही की गई है। (3)

यह वात खासतौर से कही गई है कि इलाज के दौरान सिगरेट, बीड़ी, शराब आदि नशीली चीजों से दूर रहें। (4) चार गिलास पानी सुबह ही पीना है। उसके बाद दिन में जब भी प्यास लगे तभी पानी पियें। (5) रात्रि सोने से पहले कुछ भी नहीं खाना चाहिये, खासकर सेव तो बिल्कुल नहीं। (6) पानी यदि अशुद्ध हो तो उसे रात में उबाल – छानकर रख लेना चाहिये और प्रातः निथरा हुआ पानी इस्तेमाल करना चाहिये।

पानी शुद्ध पियो

अनुभव और परीक्षणों से यह निष्कर्ष निकलता है कि इस प्रयोग से विभिन्न बीमारियां गिनती के दिनों में ही दूर हो सकती हैं। जैसे उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और मधुमेह (डायबीटिज) – एक मास में, पाचन-क्रिया और पेट के रोग जैसे गैस, कब्ज आदि दस दिन में कैंसर के रोगियों को छः मास और फेफड़ों की टी० बी० में तीन मास में लाभ हो सकता है। रोग मुक्ति के बाद भी इस प्रयोग को जारी

रखा जा सकता है।

‘इंडियन हेल्थ एसोसिएशन’ के अनुसार यह विज्ञान पर आधारित पद्धति है।

इतना पानी एक साथ पीने से आंत स्वच्छ व क्रियाशील बनती है और नया ताजा खून

बनाने में सहायता करती है। 24 घंटे का जहर शरीर से निकल जाता है। पेट साफ

रहता है। कब्ज से छुटकारा मिल जाता है। पेट साफ होने से कई बीमारियां पैदा

नहीं होतीं । अधिक जानकारी के लिए Rahmani Ayurveda चैनल पर जाएँ

ASO TITRE 100% DESTROYED IN HERBAL

ASO Titer

ASO Titer Complete Treatment By Ayurveda

एंटी-स्ट्रेप्टोलिसिन ओ Titer टेस्‍ट एक ब्‍लड टेस्‍ट है, जिसमें स्‍ट्रेप्‍टोलिसिन ओ के खिलाफ एंटीबॉडी के स्‍तर की जांच की जाती है। ये एंजाइम ग्रुप ए स्‍ट्रेप्‍टोकोक्‍कस बैक्टीरिया के द्वारा बनाया जाता है। एंटीबॉडी प्रोटीन ऐसे यौगिक होते हैं जो किस्म को बाहरी नुकसानदायक चीजों एवं तत्‍वों जैसे कि बैक्‍टीरिया से हिफाज़त करते हैं। ये शरीर में अनचाहे तत्‍वों को प्रवेश करने से रोकने में मदद करते हैं।

ASO Titer के लक्षण क्या है ?

दोस्तों अगर हम बात करें ASO Titer के लक्षण के बारे में तो शुरुवाती दौर में ASO Titer की वजह से आप के बॉडी के जॉइंट में पैन हो सकता है जियादा तर ASO Titer में लोगों के शारीर के back में पैन होता है और कभी कभी चेस्ट में भी दर्द रहता है इस के अलावाह किसी के पैरों के जॉइंट में तो किसी इन्सान के हाथ के कलाई में तो किसी के पुरे शारीर में कभी कभी यह दर्द पुरे शारीर में तो कभी कमजोरी भी महसूस होता है इस के अलावाह कभी सर में भी दर्द होता है  ASO Titer Medicine यहाँ क्लिक करें  Order NOW 

ASO Titer टेस्‍ट क्यों किया जाता है?ASO Titer टेस्‍ट ख़ास तौर पर स्ट्रेप्टोलिसिन ओ के खिलाफ बनने वाले एंटीबॉडी के स्तर की जांच कर स्ट्रेप्टोकोक्कस संक्रमण का मालूम करने के लिए किया जाता है। स्ट्रेप्टोकोक्कस संक्रमण को एंटीबायोटिक्‍स (बैक्‍टीरिया पैदा करने वाले संक्रमण को मारने वाले) की मदद करने में आसानी को कंट्रोल किया जा सकता है। इससेभी मामले सामने आ सकते हैं, जिसमें लक्षण नजर न आने की वजह से इलाज देर से शुरू हुआ हो और स्ट्रेप्टोकोक्कल संक्रमण होने के बाद परेशानी बढ़ गई हों।
स्ट्रेप्टोकोक्कल के बाद बैक्‍टीरियल एंडोकार्डिटिस, ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस और रूमेटिक फीवर जैसे अलामत सामने आने पर ASO Titer टेस्‍ट करवाने की मशवरा दी जाती है।
स्ट्रेप्टोकोक्कस संक्रमण के बाद एंटीबॉडी शरीर में 3या 8 सप्ताह तक सबसे ज्‍यादा रहते हैं और कुछ महीनों तक बने रहते हैं।

एंटी स्ट्रेप्टोलिसिन ओ, टेस्‍ट से पहले की क्या तैयारी होती हैं?
टेस्‍ट से पहले तैयारी के लिए डॉक्‍टर आपको कुछ हिदायत दे सकते हैं। टेस्‍ट से पहले 6 घंटे तक भूखे रहने के लिए कहा जा सकता है।

टेस्‍ट से पहले कुछ दवाओं का खाने के लिए भी कहा जा सकता है। हालांकि, डॉक्‍टर से पूछे बिना आपको किसी दवा को लेना बंद नहीं करना है। टेस्‍ट से पहले एंटीबायोटिक लेना टेस्‍ट के रिजल्‍ट को काफी असर करता है, इसलिए डॉक्‍टर से हुक्म किए बिना टेस्‍ट से पहले इनका सेवन ना करें।

एंटी-स्ट्रेप्टोलिसिन ओ टेस्‍ट कैसे किया जाता है? जानें _
खून के नस को रोकने के लिए आपके हाथ के ऊपरी हिस्‍से पर पलास्टिक बैंड बांधते हैं। इससे ब्‍लड लेने के लिए नस की पहचान आसानी से हो जाती है।

ब्‍लड लेने वाली सुईं को अच्‍छी तरह से साफ कर लें, ताकि इंफेक्‍शन का खतरा ना रहे।
अब नस में सुईं लगाई जाती है। कभी एक या एक से ज्‍यादा बार सुई लगाई जाती है।
ब्‍लड लेने के लिए सुईं से एक ट्यूब से जुड़ी होती है और खून लेने के बाद बैंड को हाथ से निकाल दिया जाता है।
सुईं को हटाते ही रुई को उस जगह पर लगाया जाता है। ब्‍लीडिंग को रोकने के लिए रुई को हल्‍का सा दबाया जाता है।
इसके बाद बैंडेज दिया जाता है।
बैंड बंधे होने पर हाथ में थोड़ा टाइट महसूस हो सकता है। सुईं से कुछ लोगों को ज्‍यादा दर्द महसूस होता है तो किसी को कम।

इस टेस्‍ट का न के बराबर नुकसान है। खून निकालते समय थोड़ा दर्द भी हो सकता है। इसके अलावा कई अन्य की परेशानी आ सकती हैं।

ASO Titer सैंपल निकालने में परेशानी क्या होती हैं ?

खून निकालने वाली जगह से ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना,बेहोशी ,
हेमटोमा (चमड़ा के अंदर खून का जम जाना)
सुई लगाने वाली जगह पर संक्रमण,
हालांकि, उस समय सभी परेशानियों को सही निदान से कम किया जा सकता है।
एंटी-स्ट्रेकप्टो‍लिसिन ओ ,टेस्ट के नतीजा का क्या मतलब होता है?
नॉर्मल परिणाम,नेगेटिव रिजल्‍ट का मतलब है कि आदमी को स्ट्रेप्टोकोक्कस संक्रमण नहीं है। हालांकि, दो सप्‍ताह के बाद टेस्‍ट दोबारा किया जा सकता है। हर लैब की टेस्‍ट अलग होने की वजह से नॉर्मल वैल्‍यू में थोड़ा फ़र्क हो सकता है। नतीजे और उसके साफ़ मतलब के बारे में डॉक्‍टर से बात करें।

ASO titer gharelu  Upchar

एंटीबॉडी टिटर के बढ़ने का मतलब है कि आदमी को हाल ही में स्ट्रेप्टोकोक्कस संक्रमण हुआ है, कोई अलामत नजर ना आने पर भी आदमी को स्ट्रेप्टोकोक्कस संक्रमण हो सकता है।
संक्रमण होने वाली परेशानियों का अंदाजा इस टेस्‍ट से नहीं लगाया जाता है और इस टेस्‍ट से इंफेक्‍शन की शिद्दत का भी पता नहीं लगाया जाता है। हालांकि, ये स्ट्रेप्टोकोक्कस संक्रमण से होने वाली दिक्‍कतों की जांच की करने में मदद कर सकता है।

ASO Titer curable Ayurveda Treatment

दोस्तों आप सब की जानकारी के लिए बता दूँ की ASO Titer का अभी तक एलोपैथिक में कोई सफल इलाज नहीं है वह कहावत कहते है न की Old is Gold आपको बता दूँ की ASO Titer का अब तक डॉक्टरों ने कोई सफल इलाज नहीं बताया है मेडिकल साइंस का कहना है की ASO Titer एक वायरल वायरस है और इसका अभी तक कोई दावा तो नहीं है पर हम इसपर लगातार काम कर रहे है आप सब को बता दूँ की आज के समय में किसी को भी ASO Titer है तो डॉक्टर आप को कुछ मालती विटामिन के साथ पेंसिलिन या painidure  जैसी दावा का इस्तेमाल करने की सलाह देते है पर यह दोनों दावा अगर आप सालों साल खाते है फिर भी क्योर नहीं होता है लेकिन वही बात करें आयुर्वेदा की तो इसका कई जगह में सफल इलाज किया जाता है इन्ही में से एक है रहमानी आयुर्वेदा जो फुल गारंटी से इसका इलाज करता है वह भी सिर्फ 6 months में 100 % Negative करता है

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HIV 100% DESTROYED IN HERBAL

HIV Cure in India let’s know today in this post 

आज की इस पोस्ट में हम बात करने वाले है HIV के कुछ खास Report और HIV से जुड़ी कुछ अहम चीजों के बारे में सबसे पहले हम जानेंगे की

(1)HIV कैसे होती है या किन कारणों से हो सकती है और उसका लक्षण क्या है|

जितने आसन शब्दों में आज आप सब को HIV के बारे में बताने वाला हूं मुझे नहीं लगता है की इतने आसन शब्दों में किसी ने आप को HIV के बारे में इससे पहले बताया होगा HIV से जुड़ी जो भी जानकारी आप सब को यहाँ पर मिलेगा हमारा दावा है की किसी और वेबसाइट पर यह जानकारी नहीं मिलने वाला है आजी के इस पोस्ट में HIV से जुड़े उन चीजों के बारे में बताएँगे जो इससे पहले आप को पता नहीं होगा

Basically आज हम बात करेंगे HIV से जुड़े कुछ रिपोर्ट और कुछ सवालों को लेकर तो आइये जानते है

(2) HIV  Viral Load Detectable Level को लेकर |

(3) HIV  Viral Load Undetectable Level |

(4) Viral Load क्या होता है और इस से हमें क्या पता चलता है |

(5) Western Blot Band क्या है |

(6) क्या Negative इन्सान का Viral Load आ सकता है या नहीं  |

(7) Negative और Positive वाली रिपोर्ट में Negative आया पर Viral Load 60000 लाख है इसे क्या माना           जायेगा Negative या Positive |

(8) CD4 क्या है और कैसे काम करता है और नार्मल इन्सान का CD4 कितना होना कहिये |

(9) HIV का सरल उपचार क्या है और कितना टाइम लगता है |

(10) HIV का इलाज इंडिया में है या ही यदि है तो कितना टाइम लगेगा Negative होने में

(11) HIV उपचार के दौरान किन किन चीजों से परहेज़ करना होगा

1.1 HIV कैसे होती है या किन कारणों से हो सकती है 

दोस्तों अगर हम बात करें की HIV कैसे होती है या किन कारणों से होती है तो कई ऐसे कारण है जिसके वजह से आप को HIV की बीमारी हो सकती है अगर हम सरे कारणों को यहाँ पर बताएँगे तो पोस्ट काफी लम्बी हो जायगी और दूसरी चीजों पर हम बात नहीं कर पाएंगे इसी लिए यहाँ पर हम आप सब को वही बताएँगे जो आप सब के लिए ज़रोरी है जिससे आप को बचना चाहिए ताकि HIV जैसे घातक बीमारी से सुरकक्षित रहें HIV होने की कारणों में से एक है uncarefully sex जी है दोस्तों अगर आप unsafely संबध बनाते है और आपके Partner को HIV की बीमारी है तो आप भी उसके चपेट में आ जायेंगे   अधिकजानकारी के लिए क्लिक करें  RahmaniAyurveda

1.2 दूसरा आप जब भी किसी ठाकुर के पास शेविंग कराने जाते है तो हमेशा इस बात पर धियान दें की कोई Use किया हुवा  shaving blade का इस्तेमाल न करने दें हमेशा न्यू blade का इस्तेमाल करने बोलें वैसे तो यह चीजें अभी बहुत कम होता है पर आज से 10 साल पहले पैसा बचाने के लिए एक ही blade से 3-4 shaving करते थे यह बात हम सब जानते है और यह जियादा तर गाँव देहात में ही होता था इससे होता यह था की दुसरे आदमी का फुड़ा फुलसी कट जाता था जिससे blade पर खून लग जाता था फिर वही खून आपके shaving करते समय आपके खून से तच हो गया तो भी आप HIV के शिकार हो सकते है

1.3 दोस्तों इस लिस्ट में तीसरे नंबर है है आई वी संकर्मित सिरिंज का इतेमाल करना दोस्तों यदि आप गाँव या देहात से है तो आप को याद ही होगा की पहले के झोला छाप डॉक्टर एक ही सिरिंज से कई लोगों को इंजेक्शन देते थे और यह अभी भी कही कही होता है कारण है डॉक्टर का सुस्त होना या उस समय सिरिंज का ख़त्म हो जाना और उसी समय patient का आ जाना ऐसे में patient थोड़ा सिरियस हो तो डॉक्टर आनन फानन में उसी सिरिंज से इंजेक्शन दे देते है इससे भी बचना बहुत ज़रूरी है नहीं तो आप HIV संक्रमित हो सकते है

1.4 इस लिस्ट में नंबर 4 पर है डोनेट किया हुवा ब्लड का आनन फानन में बगैर जाँच किये अपने शारीर में चड़ा लेना दोस्तों यह वक्त तब आता है जब आपके शारीर में ब्लड ख़त्म हो जाता है ऐसे में आपको ब्लड की ज़रूरत पड़ती है ऐसे में इन्सान को उस वक्त बचाना बहुत ज़रूरी होता है और इस चककर में किसी जान पहचान वाले का ब्लड ग्रुप मिल गया तो चड़ा देते है इस कारण भी आप को HIV हो सकता है   यहाँ पर क्लिक करें Rahmani Healthcare

1.5 इस लिस्ट में नंबर 5 पर है HIV संक्रमित माँ से बच्चे को जन्म देना दोस्तों यदि माँ को HIV की बीमारी है और ऐसे में बच्चे को जन्म देती है तो उस बच्चे को HIV हो सकती है

1.6 इस लिस्ट में नंबर 6 पर है बॉडी का खुद से HIV के वायरस को जन्म देना जी हा दोस्तों हमरे शारीर में पहले से हर बीमारी होती है पर वह लेवल में रहने के कारण हमें Negative कहा जाता है लेकिन जब यही बीमारी लेवल से बढ़ जाता है तो Positive कहा जाता है जैसे की शुगर की बीमारी या ASO Titer या भुखार जैसे कई ऐसे बीमारी है

 

1.2 अब आइये दोस्तों बात कर लेते है HIV के लक्षण के बारे में

दोस्तों HIV के लक्षणों में से कुछ लक्षण का हम यहाँ पर ज़िक्र करेंगे दोस्तों अगर आप को 1.हमेशा बुखार रहता है बुखार जाने का नाम नहीं ले रहा है तो एक बार HIV का टेस्ट करा लेना चाहिए 2. सर में हमेशा दर्द रहना 3. रात में नींद नहीं आना 4. हमेशा पेट में कोई न कोई दिक्कत रहना 5.लूज़ मोशन होना 6.हमेशा गले में खरास रहना 7. ज़बान में अल्सर हो जाना या घाव हो जाना 8.पुरे शारीर पर फोड़े फुलसी का होना 9.लिंक पर घाव या दाना निकल आना 10.भूख न लगना 11.सुस्ती का अहसास होना 12.बहुत जियादा थकान होना 13.काम करने का मन नहीं करना 14.जॉइंट पैन होना 15.पैर हाथ के उँगलियों से कट कट की आवाज़ आना 16.अचानक वेट बढ़ जाना या घट जाना 17.बॉडी में हर जगह रैशेज होना

2.अब आइये दोस्तों बात कर लेते है HIV  Viral Load Detectable Level को लेकर

दोस्तों HIV Viral Load Detectable Level का मतलब होता है रिपोर्ट ने आप के अंदर वायरस पाया है और यह वायरस का मात्रा कम भी हो सकता है और जियादा भी हो सकता है इस तस्वीर से वायरस को देखा जा सकता है

3.HIV  Viral Load Undetectable Level

HIV  Viral Load Undetectable Level का मतलब है Viral Load की रिपोर्ट में वायरस को टारगेट नहीं कर पा रहा है की आप के बॉडी में वायरस कितना है पर इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं के वायरस आपके बॉडी में नहीं है बॉडी में हो सकता है पर टारगेट में नहीं है उपर की फोटो में देखा जा सकता है

4.Viral Load क्या होता है और इस से हमें क्या पता चलता है |

दोस्तों नंबर 4 पर है वायरल लोड क्या होता है और हमें इससे किस चीज़ का पता चलता है आप सबकी जानकारी के लिए बता दूँ की वायरल लोड की रिपोर्ट तब की जाती है जब Negative और Positive वाली रिपोर्ट निकली जाती है और उसमें Positive पाया जाता है तब वायरस की मात्रा को चेक करने के लिए वायरल लोड की रिपोर्ट की जाती है

5.Western Blot Band क्या है | 

 

दोस्तों नंबर 5 पर आता है Western Blot Band इस रिपोर्ट से हमारे HIV के band के बारे में पता लगाया जाता है की हमारे band Negative है या Positive और यह रिपोर्ट किसी भी वक्त की जा सकती है आपके band को चेक करने के लिए

6.क्या Negative इन्सान का Viral Load आ सकता है या नहीं  |

दोस्तों नंबर 6 पर हमारे पास एक सवाल आया है की Negative इन्सान का वायरल लोड आ सकता है या नहीं तो आप सबकी जानकारी के लिए बता दू की किसी भी Negative इन्सान का वायरल लोड कभी भी नहीं आ सकता है यदि उनका वायरल लोड detect होता है तो वह फिर Negative नहीं Positive माना जायेगा

7.Negative और Positive वाली रिपोर्ट में Negative आया पर Viral Load 60000 लाख है इसे क्या माना जायेगा Negative या Positive |

सवालों के लिस्ट में एक और सवाल है की Negative और Positive वाली रिपोर्ट में Negative आया पर Viral Load 60000 लाख है इसे क्या माना जायेगा Negative या Positive जी अगर ऐसा कभी भी हुवा तो सबसे पहले एक रिपोर्ट को false माना जायेगा और इसकी confirmation के लिए आपको western blot की तरफ जाना होगा और band को चेक करना पड़ेगा

8.CD4 क्या है और कैसे काम करता है और नार्मल इन्सान का CD4 कितना होना कहिये |

दोस्तों CD4 की जाँच हमारे इम्यून system को पता करने के लिए की जाती है दोस्तों अब यह immune system क्या होता है बताते चले की Immune System हमारे बॉडी के वह सेल है जो किसी भी तरह के बीमारी को रोकता है अगर आसन भाषा में बात करें तो Immune System हमारे बॉडी का सुरक्षा कवच है जो बीमारी से डायरेक्ट लड़ता है आपने यह कई बार देखा हिगा की कोई इंसान बार बार बीमार ही रहता है उसका कारण है Immune System का कमज़ोर हो जाना इस लिए अगर आप को HIV है और आपका इम्यून सिस्टम सेल 400 के उपर है तो जियादा घबराने वाली बात नहीं है इसका मतलब आपको दूसरी बीमारी का खतरा कम है और अगर 400 से निचे है तो आपको एड्स भी पकड़ सकता है

9.HIV का सरल उपचार क्या है और कितना टाइम लगता है | 

दोस्तों HIV के सरल उपचार के लिए YouTube में पहली बार step by step सब कुछ बताया गया है इससे पहले आज तक किसी ने इनता openly नहीं बताया होगा इस video को देखने के बाद किसी भी जगह जाने की ज़रुरत नहीं होगी आपको HIV से रिलेटेड यहाँ सब कुछ मिल जायेगा video देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

10.HIV का इलाज इंडिया में है या ही यदि है तो कितना टाइम लगेगा Negative होने में

11.HIV उपचार के दौरान किन किन चीजों से परहेज़ करना होगा

दोस्तों HIV के उपचार के दौरान जिन जिन चीजों से परहेज़ करना है इस के बारे में जानने के लिए उपर के video को देख सकते है यदि आप को उस video में परहेज़ समझ में नहीं आ रहा है तो आप comment कर सकते है HIV के परहेज़ पर अलग से एक video बना दूंगा

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एड़ियों के फटने से आप भी है परेशान तो फ़ौरन अपनाएं यह ट्रिक

एड़ियों पैर फटने का कारण

एड़िया क्यों फटती हैं,इसे ठीक करने के घरेलू नुस्खे

फटी हुई एड़ियां पैरों की एक आम बीमारी है। अधिकतर लोग एड़िया फटने की परेशानी को सख्ती से नहीं लेते। पर क्या आप जानते हैं कि फटी एड़ियों को अगर लंबे समय तक छोड़ किया जाए तो इस के ज़रिए से एड़ियों में दर्द, सूजन,

और खून निकलने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है । यदि आप भी फटी एड़ी की शिकायत से परेशान हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ आसान और असरदार घरेलू नुस्खे जिसे आप अपनाकर फटी एड़ियों की शिकायत को आप आसानी से ख़त्म कर सकते हैं। यहां से जान सकते हैं कि फटी एड़िया कैसे सही करें और एड़िया फटने का क्या वजह है ?

एड़ियों के फटने से है परेशान तो अपनाएं यह घरेलू उपचार

इसके अलावा गलत तरीके के फुटवियर पहनने या फिर टाइट या हाई हील्स वाले फुटवेयर पहनने से भी फटी एड़ियों की शिकायत होती है।”एलोवेरा जेल” कमरे के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है ये तो हम सभी जानते हैं।

जिस तरह एलोवेरा जेल कमरे को पोष देता है ठीक उसी तरह एड़ियों की दरारों को जल्द भरने में भी मदद करता है। आप एड़ियों की फटने से परेशान हैं तो रात को सोने से पहले पैरों को अच्छी तरह पानी से साफ करें।

फिर इस पर एलोवेरा जेल मालिश करें। आप रात को पतले मोज़े पहन कर सो सकते हैं तो ये और भी जल्दी ठीक होगा।
एलोवेरा जेल के अलावा पेट्रोलियम जेली से भी एड़ियों की फटनों को भर सकती हैं । इसके लिए आपको एड़ियों पर पेट्रोलियम जेली की पतली सी पलती लगानी होगी ।एड़ियों  फटने का कारण

इसे लगा कर रात भर के लिए छोड़ दें अगले दिन आपको फर्क महसूस हो जाएगा । पक्का केला आपकी फटी एड़ियों की परेशानी से निजात दिला सकता है । इसके लिए एक पक्का केला लेकर उसे मसल करें और फिर फटी हुई एड़ियों पर लगाएं । केले को पन्द्रह मिनट तक सूखने दें और फिर पानी से धो लें।

दूध और शहद से भी कमरे के लिए बहुत अच्छा माना जाता है । ऐसे में फटी एड़ियों के लिए ये भी किसी अच्छे इलाज से कम नहीं है। इसके लिए दूध और शहद को मिलाकर एक अच्छा सा पेस्ट बना सकते हैं। और फटी एड़ियों पर लगाएं।

थोड़ी देर इसे सूखने दें और फिर ठंडे पानी से धो लें । दूध और शहद से पैरों को काफी ज्यादा पोष मिलता है।
चावल का आटा आपके फटी एड़ियों की परेशानी से नजात दिला सकता है । इसके लिए चावल के आटे को शहद में मिला ले ।

इस पेस्ट को एड़ियों पर लगाएं और थोड़ी देर सूखने दिया करें एक तरफ जहां शहद से चमड़े को नरमी मिलेगी तो वहीं चावल के आटे से खुरदुरापन से दूर होगा। नारियल तेल कई परेशानी की एक दवा है । इस हालत में पैरों को अच्छी तरह से साफ करें और नारियल तेल लगा लें ।

अगर एड़ियों से खून आने की शिकायत हो रही है तो नारियल का तेल काफी ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

एड़ियों को नमक के पानी से सफाई करें।

एड़ी को फटने से बचाने के लिए उसकी सफाई करना बहुत जरूरी है। ऐसे में नमक का पानी एड़ी साफ करने के लिए बेहतर तरीका है। हफ्ते में लगभग दो या तीन बार सफाई करनी चाहिए। कोशिश यह करें कि पानी में सोडा नमक का इस्तेमाल करें। सही से पैर साफ करने के बाद नारियल का तेल लगाएं।

एड़ियों गुलाब जल से साफ करें

सर्दियों के मौसम में एड़ियों को फटने से बचाने के लिए ग्लिसरीन और गुलाब जल आपके बहुत काम आ सकता है। इसके लिए बस आपको रात में अपने पैरों पर लगाना है। आप चाहें तो इसे एक शीशी में बनाकर भी रख सकते हैं। ख़ास ध्यान रहे कि गुलाब जल और ग्लिसरीन की मात्रा बराबर हो। हो सके तो इसमें आधा नीबू भी नहीं निचोड़ लें। ताके सही हो।

 

 

गैस की बीमारी से है परेशान तो उपनाये यह 7 फार्मूला

गैस की बीमारी का सटीक उपचार

गैस से होने वाली बीमारियां

गैस से होने वाली बीमारी से परेशान लोगों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। कई बार यह देखा गया कि पेट के गैस से लोग बेचैन तक हो जाते हैं। इसलिए ये ज़रूरत है कि इस परेशानी को दूर करने के कोशिशों और उसके इलाज पर बात की जाए।

पेट के गैस की परेशानी से पीड़ित इंसान के पेट में जलन की शिकायत होती है । कुछ लोगों के गले में जलन या सर दर्द की परेशानी भी रहती है । इसलिए इस दौरान खाने पीने का दिल भी नहीं करता है जिससे परेशानी और बढ़ जाती है । कई वजहों

से पेट में गैस बनती है। इसके कुछ ख़ास वजह हैं सही वक्त पर खाना न खाना, सहीतौर सेखाना न खाना और एक्सरसाइज न करना। गलत वक्त पर सोने या जागने की वजह से भी कई बार पेट में गैस की परेशनी हो जाती है।

पेट में गैस होने की वजह से कब्ज भी हो सकती है कई लोगो को अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है। कब्ज की वजह से पूरा दिन थकान ,सर में भारीपन और पेट फूलने जैसी परेशानी रहती है। जिसकी वजह से आपका पूरा ध्यान पेट की तरफ लगा रहता है

और आपका पूरा दिन ख़राब हो जाता है । इसलिए आइए गैस से होने वाले रोगों और इसे खत्म करने के तरीके को इस मजमून के के ज़रिए जानें।

लौंग और शहद खाने से खत्म होता है।

पेट में होने वाली गैस की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ दो लौंग काफी है । ये बहुत ही आसान तारिका है और आपको कहीं जाने की जरुरत भी नहीं है।आयुर्वेद में तो पेट में होने वाली गैस को दूर करने में लौंग को एक ख़ास की दवाई मानी जाती है।

लौंग को चूसने से ही आपकी गैस खत्म हो जाएगी और इससे हमारा पेट भी ठीक रहता है। अगर आप लौंग को शहद के साथ लेंगे तो आपकी कब्ज भी दूर हो जाए गी अगर कब्ज नहीं होगी तो फिर आपको गैस की शिकायत भी नहीं रहेगी।

नींबू के पानी से गैस खत्म होता है

अगर आप हर दिन सुबह खली पेट गर्म पानी में एक नींबू का रस मिलकर पिये तो इससे भी पेट सही रहता है और पाचन भी ठीक ढंग से काम करता है। इसका फायदा यह होता है कि इससे हमारे पेट की गैस भी दूर हो जाती है।

मेथी का काढ़ा से ईलाज करें।

मेथी से बना काढ़ा गैस से होने वाले रोगों को दूर करने में ख़ास तौर से इस्तमाल किया जाता है। इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए आप मेथी को पानी में भिगो दें और फिर इसे पानी में उबाल कर काढ़ा बना लें और इसे पियें तभी आपको बहुत ही जल्दी पेट में होने वाली गैस की परेशनी से छुटकारा मिल जाएगा।

हल्दी खाने से गैस खत्म होता है

हल्दी भी हमें गैस से होने वाली बीमारी से बचाने में मददगार साबित होती है । हल्दी पेट में गैस की परेशानी को दूर करती है और ये खाने को पचाने में भी मदद करता है इसलिए हम रोज थोड़ी सी हल्दी खाना चाहिए । हल्दी खाने से आप मुख्तलिफ फ़ायदा उठा सकते हैं।

जीरा पाउडर से गैस खत्म होता है।

पेट में होने वाली गैस व जलन को दूर करने में जीरा बहुत ही ज़्यादा काम करता है जिसको खाना सही ढंग से पचता न हो उसे हर रोज एक गिलास पानी में जीरा पाउडर मिलकर पीना चाहिए इससे पेट की इन परेशानो से छुटकारा मिल जाता है

पानी पीने से गैस खत्म होता है।

गैस से होने वाले ज़्यादातर रोगों के पीछे एक ख़ास बात यह है पानी की कमी । पानी आसानी से उपलब्ध है इसलिए हमें दिन में ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीते रहना चाहिए। हर रोज एक दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए । जिसकी वजह से हम पेट की बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।gas medicine and treatment

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी है इतनी सारी बिमारियों का इलाज देख लो वरना पछताओगे

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी

 

यूनानी में जितने भी खमीरे बन ते हैं दिल और दिमाग को तकवियत देने के लिए बनते हैं खमीरा गाज़बाॅ अम्बरी के फवाइद की अगर बात करें तो यह दिल और दिमाग को तकवीयत पहुंचाते है आंख की रोशनी को बढ़ाता है याददाश्त को बढ़ाता है दिल की धड़कन को दूर करता है पढ़ने वाले बच्चे व दिमागी काम करने वाले लोगों के लिए एक बेहतरीन दवाई मानी जाती है

 खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी क्या है 

आइये जानते है इसका इस्तेमाल करने का तारिका, इसके कीमत  और इसका नुस्खा  के बारे में  हैं

किस जड़ी बूटियों से बनाया जाता है खमीरा गाज़बाॅ अम्बरी को आइये जानते है आबरेशम मुकर्रज ,बादरंग बोया ,बुरादा संदल सफेद ,बर्गे गांवजबां ,बेहमन सुर्ख ,तुखम बालंगा ,तोदरी सुर्ख ,किशनीज खुश्क ,गुले गावज़बाॅ ,गुले खत्मी ,सत लेमु ,नतरूल बंजारी ,अम्बर अशहब,वर्क नुकरा,जहर मोहरा,कुश्ता जमरूद,कुश्ता मरवारीद,याकूत महलूल,यसब सब्ज महलूल, शक्कर सफेद इन तमाम जड़ी बूटियों और कीमती चीज़ों के मिलावट से खमीरा गाज़बाॅ अम्बरी को तैयार किया जाता हैै।

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी के फायदे

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी दिल और दिमाग के लिए एक बेहद फायदेमंद टॉनिक है इसके इस्तेमाल करने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है यह दिमाग को मजबूत करता है साथ ही साथ में यादाश्त को बढ़ाता है यह तनाव को दूर करता है

इसके इस्तेमाल करने से डिप्रेशन दूर होता है तनाव और चिंता जैसी परेशानी को दूर कर के दिमागी सुकून और शांति देता है इसके इस्तेमाल करने से अच्छी नींद आने लगती है नींद की कमी को दूर कर ने में आराम मिलता है।

दिमागी उलझन के वजह से जिन मरीजों को नींद नहीं आती उनके लिए एक अच्छा विचार की दवाई है दिमागी मेहनत करने वालों के लिए है एक लाभ दायक खमीरा है इसके इस्तेमाल करने से आंखों की रोशनी तेज़ होती है

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी क्या है
RAHMANI AYURVEDA

धड़कन की बीमारी हार्ट अटैक का बढ़ जाना जैसी बीमारी को दूर कर के धड़कन को खत्म करता है लगातार रहने वाला सर दर्द या आधे सिर दर्द में होने वाले सर दर्द की परेशानी, इसके मुसलसल इस्तेमाल करने से ठीक हो जाती है

दिल की घबराहट और परेशानी दिल की बेचैनी जैसी बीमारी के लिए एक मुफीद दवाई है।दिल की घबराहट,दिल की बेचैनी को दूर करता है,इसके इस्तेमाल करने से दिल व दिमाग को तकवियार पहुंचती है,दिमाग को मजबूती देकर याददाश्त को बढ़ाताता है,इसके इस्तेमाल से चिंता तनाव जैसी बीमारी कोई दूर करता है,

इसे भी पढ़े: पथरी के बीमारी का 100% गारंटी इलाज के लिए इसे भी पढ़े 

इसके इस्तेमाल से नींद न आने जैसी बीमारी दूर होती है अच्छी नींद आती है। यह एक अच्छा टॉनिक का काम करता है साथ ही जनरल वीकनेस को जड़ से खत्म करता है बढ़ती उम्र की वजह से आई कमजोरी को दूर करता है

यह आंखों की रोशनी को बहुत ज़्यादा बढ़ाता है इसके मुसलसल इस्तेमाल कराने से चश्मा को भी हटाया जा सकता ।
पुराने नजला जुकाम को जड़ से दूर कर के सिस्टम को मजबूत करता है।पढ़ने वाले बच्चों की याददाश्त को बहुत ही ज़्यादा तेज करता है

उनकी भूलने की परेशानी को जड़ से दूर करता है। दिमाग से मेहनत करने वाले के लिए यह एक खास किस्म की दवाई है यह दिमाग को सुकून देता है । इसके लगातार इस्तेमाल से भूलने जैसी परेशानी दूर होती है। भीड़ में जाने से घबराहट या ज्यादा शोर की आवाज सुनने से दिल की बेचैनी जैसी बीमारी को दूर करता है।

सर दर्द जैसी बीमारी के लिए यह एक बे जोड़ दवाई है लगातार इस्तमाल करते रहने वाला सर दर्द या आधे सिर में होने वाले सर दर्द के लिए बेहद मुफीद दवाई है।

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी का तरीका इस्तेमाल।

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी वाला पांच से सात ग्राम सुबह खाली पेट यह दिन में दो बार सुबह शाम एक गिलास नीम गर्म दूध के साथ खाना चाहिए या फ़िर डॉक्टर या किसी हकीम के मशवरा से लेना चाहिए

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी के नुकसानात है या नहीं।

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी हर्बल जड़ी बूटियों से बनी एक यूनानी दवाइ हैं सही तरीके से लेने पर कोई नुकसान देखने को नहीं मिलता है इसे छोटे बच्चों में भी खासकते हैं उनकी उम्र और वजन के हिसाब से अपने डॉक्टर से मशवरा लेकर इस्तेमाल किया जा सकता है शक्कर इसमें मिला होने के वजह से शुगर के मरीज को एक बार doctor से सलाह लेना ज़रूरी है।

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी की कीमत क्या है।

खमीरा गावज़बाॅ अम्बरी यूनानी की एक ख़ास दवाई है इसे यूनानी की सभी कंपनियां बनाती हैं जिसे हमदर्द, रेक्स रेमेडीज, दवाखाना, न्यू शमा, मशहूर कंपनी हमदर्द के साठ ग्राम पैक कीमत 95 रूपये है | 125 ग्राम पैक कीमत 118 रूपये है आप इसे यूनानी दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी घर मंगवा सकते ।हैंखमीरा गावज़बाॅ अम्बरी

क्या आप के भी आखों से पानी बहता है तो यह नुस्खा है आप के लिए

क्या आप के भी आखों से पानी बहता है

क्या आप के भी आखों से पानी बहता है कहा जाता हैं कि जब मन गमज़ादा होता है तो आंख से आंसू आना आम बात है, लेकिन टीवी_फोन_ लेपटॉप के चलाने पर अगर आंख से पानी आए तो ये कमज़ोरी या आंख की रोशनी कम होने के वजह भी हो सकता है। अगर आपके आंख से पानी या आंसू बिना किसी वजह के निकल आते हैं तो इसे नहीं छोड़ना चाहिए। इस हालत में बिना किसी वजह आंख से आंसू आ जाते हैं और पूरे तौर पर बाहर निकल नहीं पाते हैं।

क्या आखों से पानी बहता है तो फ़ौरन करें यह काम 

चिकित्सकों के मुताबिक़ आँसू की मदद से आँख की सतह नमी रहती हैं, लेकिन हर वक्त आंख से पानी आने से कुछ साफ़ साफ़ दिखाई भी नहीं देता है, इसके अलावा यह दूसरे तरह की परेशानियों को दावत देने का काम कर सकती हैं। इसलिए बेहतर है कि आप इस का इलाज जल्द से जल्द करा लें। इस तरह की परेशानी का इलाज घरेलू दवाओं से भी किया जा सकता है। हम आपको इन्हीं घरेलू नुस्खे और इससे बचने के बारे में बताना चाहूंगा ।

गरम कपड़े से भाप लें l

आंख से पानी आने की खास वजह है आंसू की रास्तों की माने माना जाता है। इस हालत में आराम पाने के लिए आप गरम कपड़े से अपनी आंख को थोड़ा दबाकर राहत ले सकते हैं। इस से रस्ताओं की रुकावट होने वाली चीज़ें हट जाता है। साथ ही मैं जहरीले चीज़ें भी आंखों से बाहर निकल जाते हैं और आंख की जलन भी ठीक हो जाता है।

टी बैग से ईलाज करें।

आंख से पानी निकलने की परेशानी के लिए हर्बल टी बैग भी एक अच्छा इस्तेमाल है। इसके लिए आपको टी बैग को थोड़ी देर गर्म पानी में रखना होगा। इसके बाद इसे अपने आंख पर रख कर सिकाई करें। ध्यान दें कि टी बैग या पानी ज्यादा गर्म न हों। इससे आपको काफी जल्दी आराम मिल सकता है।

नमक और पानी का घोल से भी ईलाज करें।

कई बार आंख से ज्यादा पानी गिरने पर खुजली या जलन की परेशानि होने लगती है। इस से आराम पाने के लिए नमक और पानी का घोल काफी अच्छा माना जाता है। नमक में एंटी बैक्टीरियल मात्रा होते हैं, जो आंख से जहरीले बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद गार होते हैं। इसी प्रकार तीन दिन तक लगातर करें, आप दिन में चार से पांच बार ऐसा कर सकते हैं।

बेकिंग सोडा से आराम मिलता है।

आंख से पानी निकलने की परेशानी के लिए बेंकिग सोडा भी एक अच्छा सफल है। इसके लिए एक बर्तन में पानी गर्म कर लें और फिर इस में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिला लें। इस से असानी से आप अपने घर में बना सकते हैं। अब इस बने हुए दावा से अपनी आंख को दो से तीन बार धोएं।

अगर कुछ धूल मिट्टी चली गई हो तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि आंख में कुछ धूल मिट्टी चली गई है, इस वजह से पानी बह रहा है तो ऐसे में आप गीले कपड़े की मदद से इसे साफ कर सकते हैं। याद रहें आंख से आने वाले पानी या आंसुओं को कपड़े से ही साफ करना ज़्यादा सही रहता है।

आँख में पानी आने की परेशानियों से बचने के रास्ते
आंख की अच्छी सेहत के लिए नॉर्मल खाना खाएं,अपनी आंख को धूप और जलन से बचाएं , आखों में खुजली होने पर आंख को बार बार न छुएं,धूल मिट्टी के बचाव के लिए आंख पर चश्मा लगा कर रखे,एलर्जी वाले चीज़ों के रास्ते में जाने से एहतियात करें या बचें,आंख का मेकअप प्रोडक्ट्स किसी के साथ न मिलाएं,आंख से कुछ ज्यादा ही पानीबहने पर डॉक्टर से सलाह लें।

आंख की सेहत के लिए तरीके।क्या आप के भी आखों से पानी बहता है आप सेहतमंद आंख चाहते हैं तो इसके लिए पत्तेदार और हरी सब्जियां, ताजे फल, मछली, सूखे मेवे और अखरोट को अपनी जीवन में शामिल करें। मछली और अखरोट में ओमेगा तीन फैटी एसिड होता है। इसके खाने से ड्राई मैकुलर की बीमारी होने की उम्मीद कम हो जाती है। अलावा इसके आप सब्जियों में ब्रोक्कोली, गोभी, पालक, मटर को शामिल ज़रूर कर सकते हैं, इनमें एंटीऑक्सीडेंट के साथ ल्यूटीन भी मौजूद होता है। इनके खाने से हर तरह की बीमारियों से बच ने का हर मुमकिन कोशिश है।

 

पीलिया ने कर रखा है परेशान तो जल्दी दे करें यह काम 2 होगा ख़त्म

पीलिया का देसी उपचार

पीलिया का सबसे आसान आयुर्वेदिक उपचार 

पीलिया को अंग्रेजी में “Jaundice“कहते हैं। इस बीमारी में खून में बिला बीन के बढ़ जाने से चमड़ा, नाखून और आंखों का सफेद भाग पीला नजर आता है। पीलिया से लेस मरीज का वक्त पर इलाज न हो तो रोगी को बहुत ज़्यादा परेशानी झेलना पड़ता है।पीलिया का देसी इलाज

यह एक आम तौर से दिखने वाला गंभीर बीमारी हैं। इस रोग में लिवर कमजोर होकर काम करना बंद कर देता है। आम तौर से पीलिया होने पर लोग घबराने लगते हैं और पीलिया का इलाज करने के लिए एलोपैथिक के साथ साथ कई तरह के कोशिश करने लगते हैं। क्या आप को मालूम होना चाहिए कि आप पीलिया का घरेलू उपाय भी कर सकते हैं।

आयुर्वेद में पीलिया का उपाय करने के लिए कई रास्ते बताए गए हैं। आएं मालूम करते हैं।

पीलिया क्या है?
पीलिया तब होता है, जब जिस्म में बिलीरुबिन नामक चीज़ बहुत ज़्यादा हो जाता है। बिलीरुबिन की ज़्यादा मात्रा होने से लिवर पर बुरा असर पड़ता है, और इससे लिवर के काम करने की कूवत कमजोर होजती जाती हैं। बिलीरुबिन धीरे धीरे पूरे जिस्म में फैलना शुरू जाता हैं जिससे इंसान को पीलिया रोग हो जाता है।

पीलिया होने के वजह।
बिली रुबीन पीले रंग का चीज़ होता है। ये कोशिकाओं में पाया जाता है। जब ये कोशिकाएं मौत हो जाती हैं तो लिवर इनको फिल्टर कर देता है। जब लिवर में कुछ परेशानी होने के चलते यह काम ठीक से नहीं हो पाती तो बिलीरुबीन ज़्यादा बढ़ने लगता है।

इसी के चलते चमड़ा पीला नजर आने लगती है। लिवर में गड़बड़ी के वजह, बिलीरुबिन जिस्म से बाहर नहीं निकलता है, और इससे पीलिया हो जाता है।अलावा इसके नीचे दिए जा रहे वजह से भी पीलिया हो सकता है।

पीलिया होने पर ये निशानी हो सकते हैं ।पीलिया का देसी इलाज चमड़ा, नाखून और आंख का सफेद हिस्सा जल्दी से पीला होने लगता है। फ्लू जैसे अलामत दिखाई देना, इसमें मतली आना, पेट दर्द, भूख ना लगना और खाना न हजम होना जैसे निशानी भी दिखाई देते हैं।

लिवर की बीमारियों की तरह इसमें मतली आना, पेट दर्द, भूख न लगना और खाना न हजम होना जैसे अलामत भी दिखाई देते हैं। वजन घटना,गाढ़ा पीला पेशाब होना ,लगातार थकान महसूस करना,भूख नहीं लगना,पेट में दर्द होना,बुखार बना रहना,हाथों में खुजली चलना,

इन लोगों को पीलिया हो सकता है।

पीलिया बच्चे से लेकर उमरदराज बुज़ुर्ग तक किसी भी तरह के लोगों को हो सकता है।
बच्चे को पीलिया का खतरा ज़्यादा होता है। जब बच्चा का जन्म होता है तो बच्चे के जिस्म के लाल रक्त कोशिकाओं की ज़्यादा होती है। जब ये लेबल टूटने लगते हैं तो बच्चे को पीलिया होने की संभावना बढ़ जाती है।

बच्चे में पीलिया की इब्तेदा सर से होती है, फिर चेहरा पीला पड़ जाता है। इसके बाद सीने और पेट में फैल जाता है। आख़िर में पैरों में फैलता है। बच्चों को अगर पीलिया से 14 दिन से ज्यादा वक्त तक सख़्त रहता है तो उसके नतीजा खातर नाक हो सकते हैं

 

पीलिया का घरेलू इलाज करने के लिए तरीके।

पीलिया का इलाज गन्ने के रस से करें।
गन्ने का रस पीलिया से बे मिसाल फ़ायदे होता हैं। अगर दिन में तीन से चार बार सिर्फ गन्ने का रस पिया जाए तो इससे बहुत ही ज़्यादा फ़ायदा होता हैं।

अगर बीमारी सत्तू खाकर गन्ने का रस खाते हैं तो हफ्ता भर में ही पीलिया ठीक हो जाता है गेहूं के दाने के बराबर सफेद चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिया जाय तो भी जल्द से जल्द पीलिया दूर हो जाता है।

पीलिया का ईलाज हल्दी से करें।
हल्दी पीलिया रोग के ईलाज के लिए बहुत अच्छी होती हैं। पीलिया होने पर आप एक चम्मच हल्दी को आधे गिलास पानी में मिला लें। इसे हर दिन का मामूल में तीन बार पिएं। इससे जिस्म में मौजूद सभी परेशान कुण चीज़ें मर जाएंगे। यह नुस्खा बहुत मदद करता है। पीलिया के इलाज के लिए बहुत ही आसान नुस्खा हैं। जिससे जिस्म के खून की सफाई भी हो जाती हैं।

पीलिया के घरेलू ईलाज के लिए नारंगी का इस्तेमाल।पीलिया का देसी उपचारनारंगी मेदा को दुरुस्त करती है। यह पीलिया में भी बहुत ही मोआसिर साबित होती है। नारंगी के रस का पीने से बिलीरुबिन काहिस्सा कम होती है, और इससे लिवर की कमजोरी भी दूर होती है।

पीलिया के घरेलू इलाज के लिए टमाटर का इस्तेमाल करें।
टमाटर लाइकोपीन का फ़ायदा मंद है। सुबह खाली पेट टमाटर का रस लेने से लिवर ठीक होता है। टमाटर को नरम करने के लिए पानी में कुछ टमाटर उबालें। अच्छे से उबल जाने के बाद टमाटर की खाल को अगल से निकाल लें। टमाटर के अंदर के हिस्से को एक बर्तन में निकालें। इसे अच्छे तरीके से मिलाकर पी जाएं।

पीलिया में आपका खान पान कैसा होना चाहिए?
ऐसी कई आदतें होती है जो कि पीलिया जैसे बीमारी को पैदा करती हैं। इसलिए पीलिया होने पर आपका खान पान ऐसा होना चाहिए।

ताजा व अच्छा खाना ही खाना चाहिए।
खाना बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिये। ज्यादा पानी पिएं , इससे लीवर में मैजूद टॉक्सिन्स बाहर निकलता है,और लीवर ठीक रहता है। पीने के लिये साफ और अच्छा पानी का ही इस्तेमाल करें।पीलिया का देसी इलाज फलों का रस पिएं नींबू, संतरे जैसे दीगर फलों के रस से कूवत मिलती है, और जिस्म भी अच्छा रहता है।
थोड़ा थोड़ा खाएं ,दिन में कई बार थोड़ा थोड़ा खाएं। इससे लीवर पर ज्यादा दवाब नहीं पड़ता है।

कमर दर्द से रहते हैं परेशान तो यह देसी नुस्खा है आपके लिए

कमर दर्द का देसी इलाज है यह

कमर दर्द से पाएं मिनटों में छुटकारा यह है नुस्खा  

कमर दर्द :आजकल के नौजवान कमर दर्द से परेशान रहते हैं। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल हैं। हर किसी के पास इस कमर दर्द की वजह अलग हो सकती है। लेकिन जरूरत सभी की एक है कि कैसे जल्दी से जल्दी इस कमर दर्द से आजादी मिले।कमर दर्द का देसी इलाज है यह

कोरोना को देखते हुए अधिकतर लोग हॉस्पिटल्स जाने से डर रहे हैं। इस कारण जो ऐसी परेशानियां हैं, जिनके इलाज के लिए हम घरेलू या लाइफस्टाइल से जुड़े जुगाढ़ अपना सकते हैं, उन्हीं से अपना इलाज आजकल ज़्यादा किया जा रहा है।

घर में बैठे रहने की वजह जिस परेशानी ने सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान किया है, वह है कमर दर्द।करीब एक दहाई पहले तक कमर दर्द केवल बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी या महिलाओं में पीरियड्स के दौरान यह परेशानी ज़्यादा तर देखने को मिलती थी।

जब कि आज बचपन से लेकर 26 साल के युवा तक, हर कोई अक्सर इस परेशानी का सामना करता है। वजह है नौजवानों की बदलता हुआ हुआ काम , आदत और जॉब डिमांड्स

कमर दर्द की ख़ास वजहें
कमर दर्द की ख़ास वजहों में लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ खास बातें शामिल हैं। जैसे बहुत नर्म गद्दे पर सोना ज़्यादा वक्त तक हाई हील पहने रहना,बहुत ज़्यादा वजन बढ़ जाना, जिस्म में कैल्शियम की कमी, बहुत देर से एक ही जगह पर बैठे रहना, जिस्मानी गतिविधियों की कमी,एक्सर्साइज ना करना आदि।

दर्द से छुटकारा पाने के घरेलू इलाज: एक बड़ा चम्मच सरसों या नारियल का तेल लें। इसमें लहसुन 5 से 6 छिली हुई कलियां डालकर पका लें। जब तेल ठंडा हो जाए तो इस तेल से गुसल करने से पहले शरीर की मालिश करें। खास तौर पर कमर में।कमर दर्द का देसी इलाज है यह

लहसुन नैचरल पेनकिलर की तरह काम करता है। यह आपको जल्द राहत देगा। इस बात का खास ध्यान रखें मालिश करने के कम से कम वक्त 30 मिनट बाद गुसल करें। ताकि आपका जिस्म इस तेल को अच्छी तरह चूस ले।

बैठने मे वकफा करें: आजकल वर्क फ्रॉम होम के वजह अधिकतर औरतें घर में काम में रहती हैं और फिर एक ही जगह पर घंटों बैठकर काम करती रहती हैं। इससे भी कमर दर्द की परेशानी बढ़ जाती है। इससे बचने का तरीका यह है कि बीच-बीच में ब्रेक लें।

जानिए क्या-क्या होते हैं कमर के दर्द की आलम कमर दर्द की निशानी जानने की जरुरत होती है। जिससे कि आप पहले से ही होशियार हो जाएँ। कमर दर्द के दरम्यान देखा जाता है कि आपके जिस्म का तापमान बढ़ा हुआ होता है।

वहीं जिस्म के कई जगहों जैसे पीठ में सूजन आ सकती है। कमर के साथ पीठ में भी सूजन मालूम किया जा सकता है। अगर आप ज्यादा वक्त एक ही जगह पर लेटे या बैठे हुए हो तो ये परेशानी को दो गुना बढ़ाने का काम करता है।

ज्यादा वक्त तक अगर आप अपनी पोजीशन को नहीं बदलते हैं तो हालत और खराब हो सकती है और दर्द घुटनों तक भी फ़ैल सकता है।वहीं अगर आप ज़्यादा समय से कमर दर्द जैसे परेशानी से परेशान है तो इसे हल्के में न लें।

आप कई तरह की जांच भी करवा सकते हैं जैसे कि एक्स रे,सिटी स्कैन, फ़ैसट ओर्थोग्राम, डिस्कोग्राफी ये सारी जांचें आप करवा सकते हैं। इनसे आप को मालूम चल सकता है कि कौन सी नस के पास ज़्यादा असर पड़ रहा है।कमर दर्द का देसी इलाज है यह

जिस के वजह से कमर दर्द ठीक नहीं हो पा रहा है। साथ ही साथ इन जांचों से आपको एमआरआई की जानकारी मिल जाती है। इन जांच की रिपोर्ट को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। ताकि समस्या का सही तरीके से मसला जान के उस का इलाज अच्छे से करवाया जा सके।

,घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच अपने फ्री टाइम या मी टाइम के साथ समझौता न करें। खुद को फिजिकली और मेंटली अच्छा रखने के लिए आपको अपना वक्त देना बहुत जरूरी हो जाता है।

क्या आप भी सीने के दर्द से परेशान है तो अपनाइए यह फार्मूला

क्या आपके सीने में भी उठता है दर्द

क्या आप भी सीने के दर्द से है परेशानक्या आपके सीने में भी उठता है दर्द

क्या है सीने का दर्द:सीने में दर्द के कई वजह होते हैं, जैसे कि- मांस के नालियों में दर्द ,हड्डी में दर्द , दिल का दौरा आदि. इनमें से कुछ शिकायत मामूली हैं तो कुछ गौर करने वाली बात ये है कि ज़्यादातर लोगों को सीने में उठने वाले दर्द के पीछे की वजह पता ही नहीं चलती.

कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो सीने में सुई की तरह चुभते हैं तो कुछ हलके होते हैं। ऐसे में इन्हें बे तवजजूही करना गलत है। इसे छोड़ देने से आपकी जान पर भी खतरा आ सकती है। ऐसे में आज हम आपको सीने में दर्द के बारे में तफसील से बताने वाले हैं जिसके तहत हम आपको इसके कारणों से लेकर इसके इलाज तक की मालूमात देंगें।

जब कभी आपको सीने के बीच में यानि दरमियान में दर्द हो या भारीपन महसूस हो तो समझ जाइए कि ये दर्द ज़्यादा है । बाकी इसके कंधे, हाथ, जबड़े या पीठ में झनझनाहट होना, पसीना आना या थकावट से होने वाले दर्द पर ध्यान दिया जाना भी ज़रूरी है । इसे भी पढ़े: यह है आके लिए ज़रोरी 

इन अलमतों को नज़रंदाज़ करने से आपकी परेशानी और बिगड़ सकती है । इसलिए बेहतर है कि जब भी कभी ऐसा महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मशवरा लें ।

 

किस तरह से पाएं दर्द से राहत

अगर घरेलू इलाज कि बात करें तो हल्का खाना खाना ज़्यादा फायदेमंद होता है। इससे आपके दर्द में आराम मिल जाएगा ।
अगर ये दर्द लगातार रहता है, तो डॉक्टर के पास जाने की हड़बड़ी न दिखाएं बल्कि पहले खुद को शांत करने की कोशिश करें । क्योंकि ऐसी सिचुएशन में आपकी बेचैनी आपकी सबसे बड़ी दुश्मन बन सकती है ।

खुद को इत्मीनान करने के लिए, कुछ हेल्थ रिपोर्ट्स के ज़रिए, आप अपनी ज़बान के नीचे नाइट्रेट जैसी दवा रख सकते हैं । इसकी मदद से आपको सीने में दर्द से उतनी राहत तो मिल ही जाएगी कि जितने में आप डॉक्टर के पास जा सकें।

दर्द के कारण: बता दें कि, सीने में दर्द के कई कारण होते हैं। यह मस्कुलोस्केलेटल हो सकता है, जो चमड़ा, हड्डी या जोड़ों से पैदा होता है। इसके अलावा, ये एसिड-रिफ्लक्स हो सकता है जो फूड-पाइप या पेट में बनने वाले बीमारी से पैदा होता है।

सीने में दर्द फेफड़े से भी उठ सकता है। दर्द का एक वजह धमनियां यानी कि arteries भी हैं। मतलब यह कि, सीने में दर्द हृदय की धमनियों यानी कि हार्ट में रुकावट आने से भी हो सकता है, जिससे हृदय की बीमारियों में ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है ।

 

सीने में दर्द के अलामात:पसीना आना,सांस लेने में तकलीफ ,धड़कन कम होना,सिर में मंद दर्द होना ,डकार लेना,उल्टी होना इत्यादि भी शामिल है। इसका खास ख्याल रखें।

सीने में दर्द होने से कैसे रोकें आराम दिलाएं? छाती में दर्द को रोकने के लिए आप कई कोशिश कर सकते हैं – इसमें दोनों दिल संबंधी और गैर-दिल संबंधी छाती दर्द के किस्म शामिल हैं।क्या आपके सीने में भी उठता है दर्द मिसाल के तौर पर, जो लोग हुक्का करते हैं, वो हृदय संबंधी छाती के दर्द से हुक्का पीना छोड़ कर और एक स्वस्थ जिंदगी जी सकते हैं। जिन लोगों को दिल से संबंधी रोग होने का ज़्यादा तर खदशा लाहिक है,

वे डॉक्टर के बताए गए नियमों और दवाओं का इस्देमाल करके दिल रोग मीताअल्लिक जोखिम और उनके साथ छाती के दर्द के अलामतो को कम कर सकते हैं। एथेरोस्क्लेरोसिस का इलाज करके सीने में दर्द होने से रोका जा सकता है।

दिल-संबंधी सीने के दर्द की तरह, गैर-दिल-संबंधित सीने के दर्द की रोकथाम भी उसके दर्द के दरमियानी वजहों की रोकथाम करके कीया जा सकती है। मिसाल के तौर पर निमोनिया, मांसपेशियों में खिंचाव,

और आघात वगैरह के जोखिम को बढ़ाने वाली परेशानी से बचना भी गैर-दिल संबंधी छाती के दर्द की रोकथाम में मदद करता है।

गैस वाला दर्दक्या है?

जिसे आप गैस वाला दर्द कहते हैं, उस हार्टबर्न कहा जाता है। लेकिन, खास बात ये है कि इस दर्द का हार्ट से कोई लेना देना नहीं रहता है। असल में, ऐसा पेट में किसी परेशानी की वजह से होता है ।

ये तो आप जानते होंगे कि खाने को पचाने के लिए शरीर में कुछ एसिड निकलते हैं और जब यह एसिड ज्यादा निकलता है तो पेट की मांसपेशियों में परेशानी होती है और उससे सीने में दर्द होता है।